भारतीय शेयर बाजार स्थिर रहा, वैश्विक तनाव का असर

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जो वैश्विक बाजारों के दबाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को दर्शाता है।

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Apla Nagpur Desk
10 Sept 2026, 3:36 PM IST · 2 मिनट वाचन
Source: NDTV
भारतीय शेयर बाजार स्थिर रहा, वैश्विक तनाव का असर
खास बातें
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सेंसेक्स और निफ्टी ने दिन के अंत में क्रमशः 138 और 46 अंक की मामूली बढ़त दिखाई।

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भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 95.25 पर खुला।

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वैश्विक बाजार की भावना अमेरिकी-ईरानी तनाव और बढ़ती तेल कीमतों के कारण सतर्क बनी हुई है।

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में स्थिरता देखी गई, जिसमें सेंसेक्स ने 138 अंक की बढ़त के साथ 74,764.23 पर और निफ्टी ने 46 अंक की बढ़त के साथ 23,431.50 पर बंद हुआ। यह प्रदर्शन अमेरिकी और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुआ है, जिसने वैश्विक बाजार में अस्थिरता को जन्म दिया है। बाजार की शुरुआत में सेंसेक्स 70 अंक और निफ्टी 30 अंक ऊपर थे, लेकिन पूरे दिन ये लाभ बनाए नहीं रख सके।

इस बाजार की गतिविधियों का संदर्भ बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों में है, विशेष रूप से अमेरिकी हमलों के कारण जो ईरानी तेल टैंकरों पर हुए हैं, जिससे ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं। तेल की कीमतों में इस वृद्धि ने महंगाई और विकास को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न क्षेत्रों में बिकवाली हुई, खासकर आईटी क्षेत्र में, जिसमें 3% से अधिक की गिरावट देखी गई। वैश्विक प्रमुख सूचकांकों, जैसे डॉव और एसएंडपी 500 में भी कमजोर प्रदर्शन ने बाजार की भावना को और प्रभावित किया।

मुद्रा के संदर्भ में, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 95.25 पर खुला, जो पिछले दिन के बंद 95.11 से 14 पैसे की गिरावट को दर्शाता है। यह गिरावट बढ़ती तेल कीमतों और वैश्विक बाजार की अस्थिरता से संबंधित आर्थिक दबावों को दर्शाती है। विश्लेषकों का कहना है कि रुपये का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से निकटता से जुड़ा हुआ है।

इन बाजार की गतिविधियों के प्रभाव तुरंत व्यापार परिणामों से परे हैं। निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है, क्योंकि निफ्टी को 23,600 के स्तर पर प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है, जबकि 23,350 के आसपास समर्थन स्तर निर्धारित किए गए हैं। यदि यह समर्थन स्तर टूटता है, तो और गिरावट संभव है, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में कमी या भू-राजनीतिक तनावों में कमी बाजारों के लिए आवश्यक सुधार प्रदान कर सकती है।

आगे देखते हुए, निवेशकों को आगामी आर्थिक संकेतकों, जैसे अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक डेटा पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है, जो बाजार की भावना को प्रभावित कर सकता है। किसी भी संभावित अमेरिकी-ईरानी तनाव में कमी पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो तेल की कीमतों और इसके परिणामस्वरूप भारतीय बाजारों को प्रभावित कर सकता है। अस्थिरता के उच्च रहने की उम्मीद के साथ, इस अनिश्चित परिदृश्य में निवेशकों के लिए सतर्क दृष्टिकोण बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

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