भिवंडी कोर्ट ने पूर्व विधायक नरेंद्र पवार की जमानत याचिका खारिज की
पूर्व बीजेपी विधायक नरेंद्र पवार की anticipatory bail याचिका भिवंडी जिला सत्र न्यायालय द्वारा खारिज कर दी गई है।
नरेंद्र पवार की जमानत याचिका 28 सितंबर 2026 को खारिज की गई।
यह मामला भिवंडी के एक विश्राम गृह में हुए सामूहिक बलात्कार से संबंधित है।
पवार अभी भी फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
भिवंडी जिला सत्र न्यायालय ने पूर्व बीजेपी विधायक नरेंद्र पवार की anticipatory bail याचिका को खारिज कर दिया है। यह निर्णय 28 सितंबर 2026 को लिया गया, जबकि सुनवाई 24 सितंबर को हुई थी। पवार की कानूनी टीम अब बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील करने पर विचार कर रही है।
यह मामला उस घटना से संबंधित है जो कथित तौर पर भिवंडी के एक विश्राम गृह में हुई, जहां एक 22 वर्षीय विवाहित महिला के साथ बलात्कार किया गया। अदालत का यह निर्णय तब आया है जब छह पुलिस टीमें पवार और दूसरे आरोपी, बर्खास्त पुलिस कांस्टेबल शैलेश पाटिल, की तलाश में 13 दिनों से जुटी हुई हैं।
सुनवाई के दौरान, बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका के संबंध में अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष ने पीड़िता की विश्वसनीयता को कमजोर करने का प्रयास किया, यह कहते हुए कि उसने मदद के लिए कॉल क्यों नहीं की, जबकि उसने अपने फोन पर एक वीडियो रिकॉर्ड किया था। दूसरी ओर, जांच अधिकारी, सहायक पुलिस निरीक्षक दीपाली लांभाते ने अदालत को बताया कि पीड़िता तुरंत शिकायत दर्ज कराने में असमर्थ थी क्योंकि वह बहुत डरी हुई थी। उन्होंने बताया कि विश्राम गृह के दरवाजे रिमोट-ऑपरेटेड थे और परिसर में सिग्नल जैमर लगे हुए थे, जिससे पीड़िता को सहायता के लिए कॉल करने में कठिनाई हुई।
इस मामले के प्रभाव केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह महाराष्ट्र में महिलाओं की सुरक्षा और यौन उत्पीड़न के मामलों से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं पर महत्वपूर्ण चिंताएं उठाता है। इस मामले की जांच और अदालत के निर्णय सार्वजनिक धारणा और कानूनी प्रणाली में विश्वास को प्रभावित कर सकते हैं।
आगे देखते हुए, पवार की कानूनी टीम anticipatory bail के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील करने की योजना बना रही है। इस अपील का परिणाम भविष्य में समान मामलों के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।



