सर्जिकल स्ट्राइक के 10 साल: भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति का विकास

उरी हमले के 10 साल बाद, पाकिस्तान से जुड़े आतंकवाद के प्रति भारत की सैन्य प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।

A
Apla Nagpur Desk
28 Sept 2026, 7:37 PM IST · 2 मिनट वाचन
Source: TOI
सर्जिकल स्ट्राइक के 10 साल: भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति का विकास
खास बातें
1

सर्जिकल स्ट्राइक अब आतंकवाद के खिलाफ व्यापक रणनीति बन गई है।

2

प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान की कार्रवाई पर निर्णायक प्रतिक्रिया का संकेत दिया।

3

हाल की कार्रवाइयाँ भारत की आतंकवाद विरोधी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

28 सितंबर 2026 को, भारत ने उरी हमले की 10वीं वर्षगांठ मनाई, जो एक महत्वपूर्ण क्षण था जिसने सर्जिकल स्ट्राइक को आतंकवाद विरोधी रणनीति का एक प्रमुख घटक बना दिया। पिछले एक दशक में, ये कार्रवाइयाँ विशिष्ट सैन्य अभियानों से एक व्यापक दृष्टिकोण में परिवर्तित हो गई हैं, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान से जुड़े आतंकवाद की चुनौतियों का सामना करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान इस विकास को रेखांकित करते हैं, जो भारत के सैन्य सिद्धांत में बदलाव को दर्शाते हैं, जिसमें अब बिना जवाब दिए हमलों को सहन नहीं किया जाएगा।

2016 में शुरू की गई सर्जिकल स्ट्राइक पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों द्वारा बढ़ती तनाव और हमलों के जवाब में थीं। इन स्ट्राइकों के बाद, भारत ने बालाकोट हवाई हमले और ऑपरेशन सिंदूर जैसे महत्वपूर्ण अभियानों को अंजाम दिया, जिसने सैन्य आक्रामकता के एक नए स्तर को प्रदर्शित किया। ये कार्रवाइयाँ केवल प्रतिशोधात्मक नहीं थीं; बल्कि, ये भारत की सीमाओं के पार खतरों के प्रति उसकी धारणा और प्रतिक्रिया में एक रणनीतिक बदलाव का प्रतिनिधित्व करती थीं।

भारतीय सरकार के आधिकारिक बयानों में यह स्पष्ट किया गया है कि पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को प्रायोजित करने के आरोपों पर अब चुप रहने का युग समाप्त हो गया है। मोदी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी आतंकवादी हमले का सामना एक मजबूत और सोची-समझी प्रतिक्रिया से किया जाएगा, जिसका उद्देश्य भविष्य के खतरों को रोकना है। यह दृष्टिकोण एकीकृत सैन्य अभियानों की आवश्यकता को दर्शाता है, जो उन्नत प्रौद्योगिकी और खुफिया का उपयोग करके लक्ष्यों की पहचान और तटस्थ करने में सक्षम हैं।

इस विकसित रणनीति के प्रभाव केवल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं हैं। इसके दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता पर महत्वपूर्ण परिणाम हैं। एक अधिक सक्रिय रुख अपनाकर, भारत अपने निरोधक क्षमताओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखता है, जिससे पड़ोसी देशों के व्यवहार को प्रभावित किया जा सके। यह बदलाव भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग और साझेदारी को भी पुनर्गठित कर सकता है।

आगे देखते हुए, भारतीय सरकार अपनी आतंकवाद विरोधी रणनीतियों को और अधिक परिष्कृत करने की उम्मीद कर रही है। आगामी सैन्य अभ्यास और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ सहयोग भारत की संचालन क्षमताओं को और बढ़ा सकते हैं। जैसे-जैसे भू-राजनीतिक परिदृश्य विकसित होता है, आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत प्रतिक्रिया के प्रति भारत की प्रतिबद्धता उसके रक्षा नीति का एक महत्वपूर्ण आधार बनी रहेगी।

💬इस खबर पर आपकी क्या राय है?आपकी राय क्या है?

आगे पढ़ें