ट्रंप का चीन को हथियार बेचने का प्रस्ताव विवाद पैदा करता है

डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग से मुलाकात के दौरान चीन को हथियार बेचने का प्रस्ताव दिया, जिससे कूटनीतिक हलचल मची है।

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Apla Nagpur Desk
28 Sept 2026, 9:44 PM IST · 2 मिनट वाचन
Source: TOI
ट्रंप का चीन को हथियार बेचने का प्रस्ताव विवाद पैदा करता है
खास बातें
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अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू ने ट्रंप के हथियार बिक्री प्रस्ताव की पुष्टि की।

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अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने चीन को हथियार बेचने की किसी योजना से इनकार किया।

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टाइवान की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ी हैं।

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग के साथ बातचीत के दौरान चीन को हथियार बेचने का प्रस्ताव दिया, जो कि एक चौंकाने वाला खुलासा है। इस अप्रत्याशित कदम ने कूटनीतिक हलचलों को जन्म दिया है, क्योंकि यह बीजिंग के प्रति अमेरिकी नीति के खिलाफ है। अमेरिका के राजदूत डेविड पर्ड्यू ने इस प्रस्ताव की पुष्टि करते हुए कहा कि ट्रंप ने पूछा कि क्या जिनपिंग अमेरिकी हथियार खरीदने में रुचि रखते हैं, जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी ध्यान आकर्षित कर रहा है।

इतिहास में, अमेरिका ने 1989 के तियानमेन स्क्वायर दमन के बाद से चीन को हथियारों की बिक्री पर सख्त प्रतिबंध बनाए रखा है। अमेरिका ने हमेशा चीन को एक सैन्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा है, और हथियारों की बिक्री का कोई भी सुझाव कूटनीतिक रणनीति में एक बड़ा बदलाव माना जाता है। विदेश मंत्रालय ने पर्ड्यू की टिप्पणियों का तुरंत जवाब देते हुए कहा कि अमेरिकी कानून चीन को हथियारों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाता है और इस दिशा में कोई योजना नहीं है।

पर्ड्यू ने स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास करते हुए कहा कि ट्रंप ने ताइवान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को उजागर किया है, यह बताते हुए कि पूर्व राष्ट्रपति ने अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में ताइवान को अधिक हथियार बेचे हैं। यह बयान तब आया है जब ताइवान एक महत्वपूर्ण अमेरिकी हथियार पैकेज की प्रतीक्षा कर रहा है, जिसे ट्रंप ने चीन के साथ बातचीत में एक रणनीतिक सौदे के उपकरण के रूप में वर्णित किया था। ट्रंप की टिप्पणियों के परिणामस्वरूप ताइपे में चिंताएँ बढ़ गई हैं, जहां अधिकारियों को चिंता है कि ताइवान की सुरक्षा भविष्य की बातचीत में खतरे में पड़ सकती है।

चीन को हथियारों की बिक्री की संभावना से जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे अमेरिकी सहयोगियों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है, जिन्होंने चीन की सैन्य शक्ति के खिलाफ अपनी रक्षा रणनीतियों का निर्माण किया है। यदि अमेरिका चीन को हथियार बेचने पर विचार करता है, तो यह इन देशों के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक दुविधा पैदा करेगा, जिससे उनके अमेरिकी प्रतिबद्धताओं पर विश्वास कमजोर हो सकता है।

आगे देखते हुए, ट्रंप की टिप्पणियों का प्रभाव अमेरिकी-चीन संबंधों और वैश्विक सुरक्षा पर बढ़ती नजर रखेगा। जैसे-जैसे स्थिति विकसित होती है, यह देखना बाकी है कि बाइडेन प्रशासन इस जटिल परिदृश्य को कैसे संभालेगा, विशेष रूप से बीजिंग के साथ चल रहे तनाव और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सहयोगियों को आश्वस्त करने की आवश्यकता के मद्देनजर।

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